CBSE 12वीं बोर्ड एग्‍जाम डेट्स की घोषणा 01 जून को, सिसोदिया बोले- बिना वैक्सीनेशन के परीक्षाएं कराना बहुत बड़ी गलती साबित होगी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन (सीबीएसई) ने कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए दो विकल्प सुझाए हैं, जिन्हें कोविड संक्रमण की दूसरी लहर को देखते हुए स्थगित कर दिया गया था। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में मंत्रियों के एक समूह के समक्ष आज दोपहर एक प्रजेंटेशन दिया गया। परीक्षाएं किस फॉर्मेट में होंगी, कब होंगी और कैसे होंगी, इसकी जानकारी शिक्षा मंत्री निशंक 01 जून को देंगे।

पहले विकल्प के तहत, परीक्षा तीन महीने की अवधि के भीतर आयोजित की जा सकती है - परीक्षा पूर्व गतिविधियों के एक महीने और परीक्षा और परिणामों की घोषणा के लिए दो महीने। कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए और 30 दिनों की अनुमति दी जाएगी। परीक्षा केवल प्रमुख विषयों के लिए आयोजित की जाएगी और छोटे विषयों के लिए अंक प्रमुख विषयों में प्रदर्शन के आधार पर अलॉट किए जाएंगे। दूसरे विकल्प के तहत 19 प्रमुख विषयों में 90-मिनट की परीक्षा होगी। छात्रों को केवल एक भाषा और तीन वैकल्पिक विषयों में उपस्थित होना है। इन विषयों में उनके प्रदर्शन के आधार पर, 5वें और 6वें विषयों के परिणाम का मूल्यांकन किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्रियों की आज हुई बैठक में दिल्‍ली के उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्‍ली सरकार किसी भी तरह की परीक्षा आयोजित करने के पक्ष में नहीं है। उन्‍होंने कहा कि बोर्ड द्वारा दिए गए दोनो ऑप्‍शंस उन्‍हें ठीक नहीं लगे। 12वीं के छात्रों को पिछले रिकार्ड के आधार पर ही पास किया जाए। उन्‍होंने कहा कि देश को कोरोना की तीसरी लहर की चेतावनी दी जा चुकी है, और इसमें बच्‍चे सबसे ज्‍यादा प्रभावित होंगे।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि 12वीं कक्षा के 95 प्रतिशत छात्र 17.5 साल से अधिक की आयु के हैं। केंद्र को विशेषज्ञों से बात करनी चाहिए कि क्या उन्हें कोविशील्ड, कोवैक्सीन टीका लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों को टीका लगाने से पहले 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं कराना बहुत बड़ी गलती साबित होगी। मनीष सिसोदिया ने बैठक में कहा कि केंद्र सरकार को छात्रों के टीकाकरण के संबंध में फाइजर से बात करनी चाहिए।

पिछले वर्ष बोर्ड परीक्षाएं जुलाई में कोरोना प्रोटोकाल के साथ आयोजित की गई थीं। इस बार भी जुलाई में ही परीक्षाएं आयोजित की जा सकती है। सूत्रों ने कहा कि सरकार शॉर्ट फॉर्मेट एग्जाम करवा सकती है, और स्टेट बोर्ड को अपना निर्णय लेने की अनुमति दी जाएगी। आज राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बुलाई गई बैठक में केंद्रीय शिक्षामंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर के अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव समेत कई अधिकारी शामिल हुए।



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पहले विकल्प के तहत, परीक्षा तीन महीने की अवधि के भीतर आयोजित की जा सकती है - परीक्षा पूर्व गतिविधियों के एक महीने और परीक्षा और परिणामों की घोषणा के लिए दो महीने। कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए और 30 दिनों की अनुमति दी जाएगी। परीक्षा केवल प्रमुख विषयों के लिए आयोजित की जाएगी और छोटे विषयों के लिए अंक प्रमुख विषयों में प्रदर्शन के आधार पर अलॉट किए जाएंगे। दूसरे विकल्प के तहत 19 प्रमुख विषयों में 90-मिनट की परीक्षा होगी। छात्रों को केवल एक भाषा और तीन वैकल्पिक विषयों में उपस्थित होना है। इन विषयों में उनके प्रदर्शन के आधार पर, 5वें और 6वें विषयों के परिणाम का मूल्यांकन किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्रियों की आज हुई बैठक में दिल्‍ली के उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्‍ली सरकार किसी भी तरह की परीक्षा आयोजित करने के पक्ष में नहीं है। उन्‍होंने कहा कि बोर्ड द्वारा दिए गए दोनो ऑप्‍शंस उन्‍हें ठीक नहीं लगे। 12वीं के छात्रों को पिछले रिकार्ड के आधार पर ही पास किया जाए। उन्‍होंने कहा कि देश को कोरोना की तीसरी लहर की चेतावनी दी जा चुकी है, और इसमें बच्‍चे सबसे ज्‍यादा प्रभावित होंगे।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि 12वीं कक्षा के 95 प्रतिशत छात्र 17.5 साल से अधिक की आयु के हैं। केंद्र को विशेषज्ञों से बात करनी चाहिए कि क्या उन्हें कोविशील्ड, कोवैक्सीन टीका लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों को टीका लगाने से पहले 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं कराना बहुत बड़ी गलती साबित होगी। मनीष सिसोदिया ने बैठक में कहा कि केंद्र सरकार को छात्रों के टीकाकरण के संबंध में फाइजर से बात करनी चाहिए।

पिछले वर्ष बोर्ड परीक्षाएं जुलाई में कोरोना प्रोटोकाल के साथ आयोजित की गई थीं। इस बार भी जुलाई में ही परीक्षाएं आयोजित की जा सकती है। सूत्रों ने कहा कि सरकार शॉर्ट फॉर्मेट एग्जाम करवा सकती है, और स्टेट बोर्ड को अपना निर्णय लेने की अनुमति दी जाएगी। आज राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बुलाई गई बैठक में केंद्रीय शिक्षामंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर के अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव समेत कई अधिकारी शामिल हुए।



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